विस्तृत उत्तर
दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य/चण्डी) के 13 अध्यायों में नौवाँ अध्याय 'उत्तम चरित्र' खण्ड में आता है और इसका विशेष महत्व है।
नौवाँ अध्याय — निशुम्भ वध
1विषय
इसमें देवी ने महादैत्य निशुम्भ का वध किया है। शुम्भ-निशुम्भ दोनों भाइयों ने त्रिलोकी पर अधिकार जमा लिया था — देवी ने पहले निशुम्भ को मारा।
2विशेष महत्व
- ▸यह 'उत्तम चरित्र' (अध्याय 5-13) का प्रमुख भाग है — सरस्वती शक्ति से सम्बन्धित।
- ▸नौवें अध्याय में देवी के विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और शक्ति का विस्तृत वर्णन।
- ▸शत्रुनाश, विघ्न निवारण, और अजेयता की प्राप्ति हेतु इस अध्याय का विशेष पाठ किया जाता है।
3सांकेतिक अर्थ
निशुम्भ = 'निः' + 'शुम्भ' = बिना शोभा वाला = अहंकार/अज्ञान। देवी ने अज्ञान रूपी दैत्य का नाश किया = ज्ञान की विजय।
4पाठ में विशेष
- ▸जो साधक विशेष रूप से शत्रुनाश, कोर्ट केस, या विरोधियों से मुक्ति चाहते हैं, उन्हें नौवें अध्याय का विशेष पाठ करने का विधान कुछ परम्पराओं में है।
- ▸सम्पूर्ण सप्तशती पाठ न कर सकें तो कम से कम 1, 2, 4, 9, 11, 13 अध्याय पढ़ने का 'षडंग' विधान है।
ध्यान दें: सप्तशती का सम्पूर्ण पाठ ही सर्वोत्तम है। अकेले एक अध्याय का पाठ गुरु परामर्श से ही करें।





