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देवी उपासना📜 मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती), देवी माहात्म्य2 मिनट पठन

दुर्गा सप्तशती पाठ में नौवें अध्याय का क्या विशेष महत्व है

संक्षिप्त उत्तर

9वाँ अध्याय = निशुम्भ वध (उत्तम चरित्र)। शत्रुनाश, विघ्न निवारण, अजेयता हेतु विशेष। निशुम्भ = अज्ञान/अहंकार — देवी द्वारा नाश = ज्ञान विजय। षडंग पाठ (6 अध्याय): 1,2,4,9,11,13 — यदि पूर्ण न कर सकें। सम्पूर्ण पाठ सर्वोत्तम।

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विस्तृत उत्तर

दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य/चण्डी) के 13 अध्यायों में नौवाँ अध्याय 'उत्तम चरित्र' खण्ड में आता है और इसका विशेष महत्व है।

नौवाँ अध्याय — निशुम्भ वध

1विषय

इसमें देवी ने महादैत्य निशुम्भ का वध किया है। शुम्भ-निशुम्भ दोनों भाइयों ने त्रिलोकी पर अधिकार जमा लिया था — देवी ने पहले निशुम्भ को मारा।

2विशेष महत्व

  • यह 'उत्तम चरित्र' (अध्याय 5-13) का प्रमुख भाग है — सरस्वती शक्ति से सम्बन्धित।
  • नौवें अध्याय में देवी के विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और शक्ति का विस्तृत वर्णन।
  • शत्रुनाश, विघ्न निवारण, और अजेयता की प्राप्ति हेतु इस अध्याय का विशेष पाठ किया जाता है।

3सांकेतिक अर्थ

निशुम्भ = 'निः' + 'शुम्भ' = बिना शोभा वाला = अहंकार/अज्ञान। देवी ने अज्ञान रूपी दैत्य का नाश किया = ज्ञान की विजय।

4पाठ में विशेष

  • जो साधक विशेष रूप से शत्रुनाश, कोर्ट केस, या विरोधियों से मुक्ति चाहते हैं, उन्हें नौवें अध्याय का विशेष पाठ करने का विधान कुछ परम्पराओं में है।
  • सम्पूर्ण सप्तशती पाठ न कर सकें तो कम से कम 1, 2, 4, 9, 11, 13 अध्याय पढ़ने का 'षडंग' विधान है।

ध्यान दें: सप्तशती का सम्पूर्ण पाठ ही सर्वोत्तम है। अकेले एक अध्याय का पाठ गुरु परामर्श से ही करें।

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शास्त्रीय स्रोत
मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती), देवी माहात्म्य
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