विस्तृत उत्तर
काली माता की पूजा में दीपक जलाने के लिए घी और तेल दोनों का विधान है, किन्तु प्रयोग भिन्न है।
सरसों का तेल — काली पूजा में विशेष
काली माता को सरसों के तेल का दीपक अत्यन्त प्रिय माना गया है। तांत्रिक परम्परा में काली, भैरव, हनुमान और शनि देव की पूजा में सरसों का तेल प्रमुख है। इसका कारण:
- ▸सरसों = तामसिक गुण — काली माता तमोगुण की अधिष्ठात्री (संहार शक्ति)।
- ▸सरसों तेल = तीव्र, उग्र — काली की उग्र शक्ति का प्रतीक।
- ▸नकारात्मक ऊर्जा नाश में सरसों तेल प्रभावी माना जाता है।
घी का दीपक — सात्विक पूजा में
गाय के घी का दीपक सभी देवी-देवताओं की पूजा में सर्वोत्तम और सात्विक है। यदि सौम्य/सात्विक रूप में काली माता की पूजा करें तो घी का दीपक शुभ।
व्यावहारिक नियम
- ▸तांत्रिक/विशेष काली साधना = सरसों तेल।
- ▸सामान्य/घरेलू काली पूजा = घी या सरसों तेल दोनों मान्य।
- ▸दीपावली काली पूजा (बंगाल) = सरसों तेल प्रमुख।
- ▸दोनों एक साथ भी जला सकते हैं — एक घी, एक तेल।
वर्जित
मिलावटी तेल, रिफाइंड तेल — शुद्ध सरसों/तिल तेल ही प्रयोग करें।





