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देवी उपासना📜 तंत्र शास्त्र, काली पूजा परम्परा, बंगाली शाक्त परम्परा2 मिनट पठन

काली मां को नीबू काटकर अर्पित करने का क्या विधान है

संक्षिप्त उत्तर

काली को नीबू: नीबू = नकारात्मक ऊर्जा अवशोषक। काटकर अर्पित = बाधाएँ काली माता को सौंपना। विषम संख्या (1/3/5), 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः', कुमकुम/सिंदूर लगाएँ। मंगलवार/शनिवार/अमावस्या। तांत्रिक/लोक परम्परा — सभी शाखाओं में नहीं।

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विस्तृत उत्तर

काली माता को नीबू काटकर अर्पित करना मुख्यतः तांत्रिक और लोक परम्परा में प्रचलित है।

विधान

1नीबू अर्पण का अर्थ

नीबू = नकारात्मक ऊर्जा/बुरी दृष्टि का अवशोषक। काली माता = नकारात्मकता/अन्धकार की विनाशिनी। नीबू काटकर अर्पित करना = अपनी नकारात्मक ऊर्जा/बाधाओं को काली माता को सौंपकर उनसे मुक्ति पाना।

2कैसे अर्पित करें

  • स्नान/शुद्धि के बाद।
  • एक या अधिक (विषम संख्या — 1, 3, 5, 7) नीबू लें।
  • नीबू को चाकू/चम्मच से काटें (कुछ परम्पराओं में मन्दिर में ही)।
  • 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः' बोलकर काली माता के चरणों में रखें।
  • कटे नीबू पर लाल कुमकुम/सिंदूर लगाएँ।

3कब

  • मंगलवार/शनिवार — काली माता के प्रमुख दिन।
  • अमावस्या — काली पूजा विशेष।
  • काली पूजा (कार्तिक अमावस्या — बंगाल)।
  • किसी भी संकट/बाधा निवारण हेतु।

4तांत्रिक प्रयोग

तंत्र शास्त्र में नीबू से बुरी नजर, टोटका, और नकारात्मक शक्तियों का निवारण किया जाता है। काली माता इन शक्तियों की विनाशिनी हैं।

ध्यान दें: यह मुख्यतः तांत्रिक/लोक परम्परा है। सभी शाखाओं/सम्प्रदायों में यह प्रचलित नहीं। गम्भीर तांत्रिक अनुष्ठान गुरु मार्गदर्शन में ही करें।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र, काली पूजा परम्परा, बंगाली शाक्त परम्परा
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