देवी पूजा नियमदेवी मंत्र जप में लाल वस्त्र और लाल आसन क्यों आवश्यक हैं?लाल = शक्ति/रक्त/जीवन = देवी। कुंकुम/सिंदूर प्रिय। मूलाधार चक्र = लाल (कुंडलिनी)। ऊर्जा resonance। तंत्र: लाल आसन = शक्ति संग्रह। अपवाद: काली=काला, सरस्वती=सफेद।#लाल#वस्त्र#आसन
दैनिक आचाररविवार को लाल रंग पहनने का महत्वरविवार = लाल/केसरिया (सूर्य)। तेज, अधिकार, स्वास्थ्य, नेतृत्व। सूर्य पूजा, अर्घ्य। माणिक रत्न। ज्योतिष परंपरा।#रविवार#लाल#सूर्य
दैनिक आचारमंगलवार को लाल रंग पहनने से क्या लाभमंगलवार-लाल = मंगल दोष शमन, साहस/ऊर्जा, हनुमान कृपा, विजय, आत्मविश्वास। हनुमान को लाल प्रिय। मनोविज्ञान: लाल = confidence। ज्योतिष परंपरा।#मंगलवार#लाल#मंगल
देवी उपासनाकाली पूजा में काले कपड़े पहनने चाहिए या लालकाली पूजा वस्त्र: लाल = सर्वमान्य, सर्वोत्तम (शक्ति/सौभाग्य)। सामान्य भक्त लाल ही पहनें। काला = केवल तांत्रिक साधना (गुरु आज्ञा से)। गहरा नीला भी कुछ परम्पराओं में। शुद्ध मन + श्रद्धा > वस्त्र रंग।#काली पूजा#वस्त्र#लाल
देवी उपासनादेवी मंदिर में चुनरी बांधने का क्या विधान हैदेवी चुनरी: लाल सर्वोत्तम (शक्ति/सौभाग्य)। स्नान → हल्दी-कुमकुम छिड़कें → देवी को ओढ़ाएँ / मन्दिर में बाँधें → 'ॐ दुर्गायै नमः'। मनोकामना/मन्नत हेतु। सुहागिनें पति दीर्घायु, कन्याएँ वर प्राप्ति हेतु। शक्तिपीठों में विशेष परम्परा। नई/शुद्ध चुनरी।#चुनरी#देवी#मनोकामना
तंत्र वस्त्रतंत्र साधना के दौरान कौन सा रंग पहनना चाहिए?तंत्र वस्त्र: काली/भैरव — काला/लाल। दुर्गा — लाल। शिव — श्वेत। तारा — नीला। रात्रि साधना — गहरे रंग। प्रातः — श्वेत/पीत। स्वच्छता सर्वोपरि। भाव शुद्ध हो तो रंग गौण।#रंग#वस्त्र#काला