विस्तृत उत्तर
देवी भगवती (दुर्गा/लक्ष्मी/पार्वती) को हल्दी चढ़ाने की परम्परा अत्यन्त प्राचीन और शास्त्र सम्मत है।
कारण
1सौभाग्य का प्रतीक
हल्दी = सुहाग/सौभाग्य का चिह्न। भारतीय संस्कृति में हल्दी विवाह, श्रृंगार और मंगल का अभिन्न अंग। देवी = आदि शक्ति, सौभाग्यदायिनी — अतः हल्दी अत्यन्त प्रिय।
2पीला रंग = शक्ति और ऐश्वर्य
पीला रंग बृहस्पति (गुरु) ग्रह और लक्ष्मी से जुड़ा है। धन, ज्ञान और ऐश्वर्य का प्रतीक।
3देवी श्रृंगार
हल्दी देवी के श्रृंगार (सोलह श्रृंगार) का अंग है — उबटन, तिलक। देवी को सुहागिन रूप में पूजा जाता है।
4पवित्रता और शुद्धि
आयुर्वेद: हल्दी एंटीसेप्टिक, एंटीबैक्टीरियल। पूजा स्थल और भक्त दोनों की शुद्धि हेतु।
5तांत्रिक महत्व
हल्दी से देवी यंत्र, चक्र, और मंत्र लिखने की परम्परा। हल्दी गाँठ (समूची हल्दी) = शक्ति का संचित रूप।
कैसे चढ़ाएँ
- ▸हल्दी पाउडर (चुटकी भर) देवी के चरणों/तिलक में।
- ▸समूची हल्दी गाँठें (5/7/9) चढ़ाएँ।
- ▸हल्दी + कुमकुम मिलाकर।
- ▸सुहागिनें विशेषकर हल्दी चढ़ाती हैं — सौभाग्य कामना।




