विस्तृत उत्तर
शुद्धिकरण के पश्चात् रत्न को एक स्वच्छ आसन पर स्थापित किया जाता है। फिर धारणकर्ता अपने गोत्र, नाम और मनोकामना का संकल्प लेकर उस रत्न से संबंधित ग्रह की अधिष्ठात्री देवी के मंत्र का 108 बार जाप करता है।
रत्न अभिमंत्रण में धारणकर्ता अपने गोत्र, नाम और मनोकामना का संकल्प लेकर अधिष्ठात्री देवी के मंत्र का 108 बार जाप करता है।
शुद्धिकरण के पश्चात् रत्न को एक स्वच्छ आसन पर स्थापित किया जाता है। फिर धारणकर्ता अपने गोत्र, नाम और मनोकामना का संकल्प लेकर उस रत्न से संबंधित ग्रह की अधिष्ठात्री देवी के मंत्र का 108 बार जाप करता है।
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