विस्तृत उत्तर
स्नान के पश्चात् साधक को शुद्ध (पीले या श्वेत) वस्त्र धारण कर, पूर्वाभिमुख होकर बैठना चाहिए। दाहिने हाथ में शुद्ध जल, कुशा, लाल पुष्प, अक्षत और काले तिल लेकर शास्त्रसम्मत संकल्प लेना चाहिए।
पौरोहित्य ग्रंथों में वर्णित संकल्प मन्त्र:
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। अद्येत्यादि... (वर्ष, अयन, ऋतु, मास, पक्ष और तिथि का उच्चारण करें) अमुकगोत्रोऽमुकशर्मा (अपना गोत्र और नाम लें) मम जन्मजन्मान्तरार्जित-समस्तपापक्षयपूर्वकं शिव-विष्णु-सान्निध्यावाप्तिकामो, दुःखदारिद्र्यनाशाय श्रीविष्णोस्तोषणाय च मकरस्थे रवौ माघे प्रातःस्नानं, सूर्य-अर्घ्य-प्रदानं, देवपूजनं तथा दानकर्म अहं करिष्ये।
अर्थ: ॐ विष्णु के स्मरण के साथ, आज इस विशिष्ट तिथि और काल में, मैं अमुक गोत्र में उत्पन्न अमुक नाम का व्यक्ति, अपने जन्म-जन्मांतर के समस्त पापों के क्षय तथा शिव और विष्णु के सामीप्य की प्राप्ति की कामना से, दुःखों और दरिद्रता के नाश हेतु तथा भगवान श्रीहरि की प्रसन्नता के लिए, सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर इस माघ मास में प्रातः स्नान, सूर्य को अर्घ्य, देव-पूजन और दान कर्म संपन्न करूँगा।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





