विस्तृत उत्तर
व्रती को सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त) उठकर जल में गंगाजल या काले तिल मिलाकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा स्थान पर हाथ में जल, अक्षत, पुष्प और सिक्का लेकर संकल्प लें: "ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः... अद्य मम (अपना नाम/गोत्र) सकल पाप क्षय पूर्वकं शिवसायुज्य कामनया, आरोग्य-ऐश्वर्य-संतान प्राप्त्यर्थं प्रदोष व्रतं करिष्ये।" दिन भर निराहार रहें या जल/फल लें, दिन में सोना, जुआ खेलना, परनिंदा करना और नमक खाना वर्जित है। 'ॐ नमः शिवाय' का मानसिक जप करते रहें।





