विस्तृत उत्तर
शनि पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में तिल मिले जल से स्नान कर काले/नीले वस्त्र पहनें। हाथ में जल, तिल, फूल और सिक्का लेकर संकल्प करें: "ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः... अद्य... (गोत्र और नाम)... मम सकल पाप क्षयपूर्वकं, शनि-जनित पीड़ा निवृत्यर्थं, ऐश्वर्य-आरोग्य-दीर्घायु प्राप्त्यर्थं च, श्री शनैश्चर देव प्रीत्यर्थं शनिवार व्रतम् अहं करिष्ये।" पश्चिम दिशा की ओर मुख कर चौकी पर काला कपड़ा बिछाएं और शनि यंत्र/सुपारी स्थापित करें। "नीलांजन समाभासं..." मंत्र से ध्यान करें। शनि देव को "ॐ शं शनैश्चराय नमः - तैलाभ्यंगं समर्पयामि" बोलकर तेल अर्पित करें। काला वस्त्र, कस्तूरी इत्र, अपराजिता/शमी पत्र, और काले तिल/उड़द का भोग लगाएं। दीपक में लोहे की कील डालना बाधा निवारक माना गया है। कथा सुनकर आरती करें।





