विस्तृत उत्तर
बिना संकल्प के किया गया कोई भी धार्मिक कृत्य फलित नहीं होता। पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। दाहिने हाथ में जल, अक्षत (बिना टूटा चावल), पान का पत्ता, सुपारी और एक सिक्का लें। फिर यह संस्कृत मंत्र पढ़ें: 'ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः अद्य ब्रह्मणोऽह्नि... [अपना नाम, गोत्र, मास, तिथि, वार बोलें]... ममोपात्त दुरितक्षयद्वारा श्रीसाम्बसदाशिवप्रीत्यर्थं तथा च [अपनी मनोकामना बोलें] सिद्ध्यर्थं सोमवारव्रतं/षोडशसोमवारव्रतं करिष्ये।' संकल्प पढ़ने के बाद हाथ का जल भूमि पर छोड़ दें।





