विस्तृत उत्तर
नई माला का प्रयोग करने से पूर्व उसकी शुद्धि और प्राण-प्रतिष्ठा करना अनिवार्य है।
इस प्रक्रिया में माला को गंगाजल, पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर) से शुद्ध किया जाता है, फिर धूप-दीप दिखाकर सम्बंधित देवता के मंत्रों से उसे अभिमंत्रित किया जाता है।
इस संस्कार से माला एक जड़ वस्तु न रहकर, दिव्य चेतना का एक जीवंत माध्यम बन जाती है।





