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मंदिर नियम⏱ 3 मिनट पठन

मंदिर की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा कैसे होती है?

प्राण प्रतिष्ठा: जड़ मूर्ति में देवता की चैतन्य शक्ति स्थापित करना।

संक्षिप्त उत्तर

प्राण प्रतिष्ठा: जड़ मूर्ति में देवता की चैतन्य शक्ति स्थापित करना। प्रक्रिया: कलश स्थापना → न्यास (आचार्य से मूर्ति में शक्ति प्रवाह) → प्राण प्रतिष्ठा मंत्र → नेत्रोन्मीलन (सबसे महत्वपूर्ण — सोने की सलाई से आँखें खोलना) → हवन → प्रथम पूजा। केवल दीक्षित आचार्य ही करा सकते हैं।

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विस्तृत उत्तर

प्राण प्रतिष्ठा हिन्दू धर्म की वह अत्यन्त महत्वपूर्ण विधि है जिसके द्वारा एक पत्थर/धातु की मूर्ति में देवता की चैतन्य शक्ति का आवाहन और स्थापना की जाती है। इसके बिना मूर्ति 'जड़' रहती है — प्राण प्रतिष्ठा के बाद वह 'सजीव' और 'पूजनीय' बन जाती है।

सिद्धांत

अग्निपुराण: 'प्राणं प्रतिष्ठापयति यया सा प्राणप्रतिष्ठा।' — जिस विधि से प्राण (चैतन्य) की स्थापना हो वह प्राण प्रतिष्ठा है।

प्राण प्रतिष्ठा की विस्तृत प्रक्रिया

1पूर्व तैयारी (1-3 दिन पहले)

  • ▸मंदिर/स्थान का शुद्धिकरण (वास्तु शान्ति)
  • ▸मूर्ति को अन्न, जल, औषधि स्नान
  • ▸अधिवास (मूर्ति को मंदिर के पास रात्रि विश्राम)
  • ▸स्थापना मुहूर्त निर्धारण (ज्योतिषी द्वारा)

2कलश स्थापना

  • ▸नौ या अधिक कलश स्थापित (नवग्रह/दिक्पाल प्रतीक)
  • ▸प्रत्येक कलश में जल, पंचरत्न, सप्तधान्य, पंचगव्य

3न्यास (शरीर में देवता का आवाहन)

  • ▸आचार्य (प्रधान पुरोहित) अपने शरीर में देवता का न्यास करता है
  • ▸मातृका न्यास, अंग न्यास, कर न्यास
  • ▸फिर अपने शरीर से देवता की चैतन्य शक्ति मूर्ति में प्रवाहित करता है

4प्राण प्रतिष्ठा मंत्र

ॐ आं ह्रीं क्रों...(देवता विशिष्ट बीज मंत्र)...अस्यां प्रतिमायां प्राणाः प्रतिष्ठन्तु।

— 'इस मूर्ति में प्राण स्थापित हों।'

5नेत्रोन्मीलन (सबसे महत्वपूर्ण क्षण)

  • ▸सोने की सलाई या दर्भ (कुश) से मूर्ति की आँखें खोली जाती हैं
  • ▸इस क्षण मूर्ति 'देखने' लगती है — देवता की चैतन्य शक्ति सक्रिय
  • ▸सर्वप्रथम दर्शन (First Darshan) — दर्पण में देवता को अपना प्रतिबिम्ब दिखाया जाता है

6हवन

  • ▸प्राण प्रतिष्ठा हवन — 108/1008 आहुतियाँ
  • ▸नवग्रह हवन
  • ▸वास्तु हवन

7पूर्णाहुति और प्रथम पूजा

  • ▸हवन की पूर्णाहुति
  • ▸मूर्ति को वस्त्र, आभूषण, पुष्प से सजाना
  • ▸प्रथम भोग और आरती
  • ▸ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा

प्राण प्रतिष्ठा कौन करा सकता है

  • ▸केवल वेद-आगम विज्ञ, दीक्षित आचार्य
  • ▸सामान्य पुजारी नहीं — विशेष योग्यता आवश्यक

प्राण प्रतिष्ठा के बाद

  • ▸मूर्ति = साक्षात् देवता — सजीव/चैतन्य
  • ▸नित्य पूजा अनिवार्य (एक दिन भी न छूटे)
  • ▸मूर्ति को अनादर, उपेक्षा = दोष

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प्राण प्रतिष्ठा कौन करा सकता है

- केवल वेद-आगम विज्ञ, दीक्षित आचार्य - सामान्य पुजारी नहीं — विशेष योग्यता आवश्यक

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