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शिव पूजा📜 शिव पुराण, लिंग पुराण, कामिक आगम, मुहूर्त ग्रंथ2 मिनट पठन

शिवलिंग की स्थापना किस तिथि में करनी चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

शिवलिंग स्थापना तिथि: महाशिवरात्रि (सर्वोत्तम), सावन सोमवार, प्रदोष (त्रयोदशी), शुभ सोमवार। स्थिर लग्न। पुष्य/रोहिणी नक्षत्र। जलाधारी उत्तर मुख। स्थापना के बाद नित्य पूजा अनिवार्य — सम्भव न हो तो चित्र रखें।

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विस्तृत उत्तर

शिवलिंग स्थापना (प्राण प्रतिष्ठा सहित) के लिए शुभ तिथि और मुहूर्त का विशेष विधान है:

सर्वश्रेष्ठ तिथियाँ

  1. 1महाशिवरात्रि: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी — शिवलिंग स्थापना की सर्वोत्तम तिथि।
  2. 2सावन का सोमवार: श्रावण मास का कोई भी सोमवार।
  3. 3प्रदोष व्रत दिवस: त्रयोदशी तिथि (शुक्ल/कृष्ण)।
  4. 4सोमवार: कोई भी शुभ सोमवार।

शुभ नक्षत्र: पुष्य, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, रोहिणी, अनुराधा, मृगशिरा।

शुभ लग्न: स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुम्भ) में स्थापना = शिव स्थायी कृपा।

स्थापना विधि (संक्षिप्त)

  1. 1शुभ मुहूर्त, शुभ दिशा (उत्तर/पूर्व मुख)।
  2. 2भूमि शुद्धि — गंगाजल, पंचगव्य से।
  3. 3आधार (पीठ/जलाधारी) स्थापना।
  4. 4शिवलिंग स्थापना — 'ॐ नमः शिवाय' सहित।
  5. 5प्राण प्रतिष्ठा — वैदिक/आगमिक मंत्रों से।
  6. 6रुद्राभिषेक — जल, दूध, पंचामृत से।
  7. 7बेलपत्र, धतूरा, आक अर्पण।
  8. 8आरती।

जलाधारी (योनि पीठ) नियम: जलाधारी का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।

विशेष: घर में शिवलिंग स्थापना करने पर नित्य पूजा-अभिषेक अनिवार्य हो जाता है। यदि नित्य पूजा सम्भव न हो तो शिव चित्र/प्रतिमा रखें, शिवलिंग स्थापना न करें।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, लिंग पुराण, कामिक आगम, मुहूर्त ग्रंथ
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