विस्तृत उत्तर
शिवलिंग स्थापना (प्राण प्रतिष्ठा सहित) के लिए शुभ तिथि और मुहूर्त का विशेष विधान है:
सर्वश्रेष्ठ तिथियाँ
- 1महाशिवरात्रि: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी — शिवलिंग स्थापना की सर्वोत्तम तिथि।
- 2सावन का सोमवार: श्रावण मास का कोई भी सोमवार।
- 3प्रदोष व्रत दिवस: त्रयोदशी तिथि (शुक्ल/कृष्ण)।
- 4सोमवार: कोई भी शुभ सोमवार।
शुभ नक्षत्र: पुष्य, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, रोहिणी, अनुराधा, मृगशिरा।
शुभ लग्न: स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुम्भ) में स्थापना = शिव स्थायी कृपा।
स्थापना विधि (संक्षिप्त)
- 1शुभ मुहूर्त, शुभ दिशा (उत्तर/पूर्व मुख)।
- 2भूमि शुद्धि — गंगाजल, पंचगव्य से।
- 3आधार (पीठ/जलाधारी) स्थापना।
- 4शिवलिंग स्थापना — 'ॐ नमः शिवाय' सहित।
- 5प्राण प्रतिष्ठा — वैदिक/आगमिक मंत्रों से।
- 6रुद्राभिषेक — जल, दूध, पंचामृत से।
- 7बेलपत्र, धतूरा, आक अर्पण।
- 8आरती।
जलाधारी (योनि पीठ) नियम: जलाधारी का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
विशेष: घर में शिवलिंग स्थापना करने पर नित्य पूजा-अभिषेक अनिवार्य हो जाता है। यदि नित्य पूजा सम्भव न हो तो शिव चित्र/प्रतिमा रखें, शिवलिंग स्थापना न करें।





