विस्तृत उत्तर
महाशिवरात्रि व्रत में फलाहार का समय और नियम:
आदर्श विधान — निर्जला व्रत
शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि का व्रत निर्जला (बिना जल) रखना सर्वोत्तम है — रात्रि के चारों प्रहर पूजा और जागरण। किन्तु यह अत्यंत कठोर है।
फलाहार कब करें
- 1प्रातःकाल (व्रत दिवस): शिवरात्रि के दिन प्रातःकाल एक बार फलाहार कर सकते हैं — फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू, मखाने आदि।
- 1प्रहर पूजा के बीच: रात्रि चार प्रहर की पूजा होती है। दो प्रहरों के बीच के अंतराल में दूध या फल ले सकते हैं।
- 1अगले दिन पारण: शिवरात्रि के अगले दिन (चतुर्दशी/अमावस्या) प्रातःकाल स्नान करके शिव पूजा के बाद पारण करें।
क्या खा सकते हैं
फल, दूध, मखाने, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, शकरकंद, सेंधा नमक। अन्न पूर्णतः वर्जित।
क्या वर्जित
अन्न (चावल, गेहूँ, दालें), प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, तामसिक भोजन।
विशेष: शिवरात्रि = रात्रि का व्रत। इसमें दिन का उपवास गौण और रात्रि जागरण प्रधान है। रात्रि के चार प्रहर शिवलिंग अभिषेक करना मुख्य कर्तव्य है। जो चारों प्रहर जागरण न कर सके, कम से कम एक प्रहर अवश्य जागें।





