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विस्तृत उत्तर
एक रत्न को खान से निकालकर, तराशकर सीधे धारण कर लेना शास्त्र सम्मत नहीं है। उसकी शुद्धि और प्राण-प्रतिष्ठा अनिवार्य है, जिसके बिना वह एक चैतन्य उपकरण के स्थान पर केवल एक सुंदर पत्थर ही रहता है।
शोधन इसलिए आवश्यक है क्योंकि रत्न पर खनन, घिसाई और विभिन्न हाथों से गुजरने के दौरान आई नकारात्मक ऊर्जाओं को समाप्त करना होता है।
यह केवल भौतिक स्वच्छता नहीं, अपितु आध्यात्मिक मार्जन है।
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