विस्तृत उत्तर
रात को — विशेषकर सोने से पहले — दर्पण देखने की मनाही हमारी सनातन परंपरा में बताई गई है। इसके पीछे धार्मिक, वास्तुशास्त्रीय और व्यावहारिक तीनों प्रकार के कारण हैं।
धार्मिक और वास्तु दृष्टि से: रात का समय तामसिक माना जाता है और इस समय नकारात्मक शक्तियाँ अधिक सक्रिय होती हैं। दर्पण ऊर्जा को परावर्तित करता है — यदि सोते समय शयनकक्ष में दर्पण हो और उसमें सोने वाले की परछाई दिखे, तो यह घर में कलह, स्वास्थ्य समस्याओं और नकारात्मकता को बढ़ाने वाला माना गया है। वास्तु शास्त्र में शयनकक्ष में दर्पण को बिस्तर के सामने न रखने की सख्त मनाही है।
यदि शयनकक्ष में दर्पण हो तो रात को सोने से पहले उसे किसी कपड़े से ढक देना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि रात में दर्पण में अपना चेहरा देखने से बुरे सपने आते हैं और मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
व्यावहारिक दृष्टि से भी: रात में कम रोशनी में दर्पण देखने से आंखों पर दबाव पड़ता है और सोने से ठीक पहले अपना प्रतिबिंब देखने से मन में आत्म-आलोचना या नकारात्मक विचार उभर सकते हैं जो नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
इसी कारण शयनकक्ष के लिए वास्तु में दर्पण को उत्तर या पूर्व की दीवार पर, बिस्तर से सामने नहीं, लगाने की सलाह दी गई है।





