विस्तृत उत्तर
तुलसी माता को विष्णुप्रिया और लक्ष्मीस्वरूपा माना गया है। शाम को तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा अत्यंत पुरानी और शास्त्रसम्मत है। पद्म पुराण और स्कंद पुराण में बताया गया है कि सूर्यास्त के समय 'संध्याकाल' में नकारात्मक शक्तियाँ और 'अलक्ष्मी' सक्रिय होती हैं। इस समय तुलसी के पास दीपक जलाने से जो प्रकाश निकलता है वह माता लक्ष्मी को घर में आमंत्रित करता है और दरिद्रता को दूर रखता है।
दीपक जलाने का सबसे उचित समय सूर्यास्त से पहले — गोधूलि बेला में — होता है। सूर्यास्त के बाद तुलसी पूजन स्वीकार्य नहीं माना जाता क्योंकि मान्यता है कि उस समय तुलसी माता विश्राम में होती हैं। इसलिए दीपक सूर्य डूबने से पहले ही जलाना चाहिए।
दीपक में घी या सरसों के तेल का प्रयोग शुभ माना जाता है। दीपक को जमीन पर सीधे न रखकर चावल, फूल या किसी आसन पर रखें। दीपक का मुख उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए। विषम संख्या में दीपक (तीन या पाँच) जलाना शुभ माना जाता है। दीपक जलाते समय 'ॐ तुलसी देव्यै नमः' का जाप करें और तुलसी की तीन से पाँच बार परिक्रमा करके प्रणाम करें।
रविवार को तुलसी पूजन पूर्णतः वर्जित है क्योंकि इस दिन तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं — इस दिन जल चढ़ाना, स्पर्श करना और दीपक जलाना — सब वर्जित माना गया है।





