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गृह आचार एवं पूजा विधि प्रश्नोत्तर — 13 प्रश्न

गृह आचार एवं पूजा विधि से जुड़े 13 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 13 प्रश्न

तोरण और बंदनवार घर में कब और क्यों लगाते हैं?

तोरण गृह प्रवेश, विवाह, जन्म और सभी त्योहारों पर लगाते हैं। आम के ताजे पत्तों का तोरण लक्ष्मी का आह्वान करता है और नकारात्मकता को दूर रखता है। सूखने पर तुरंत बदलें।

तोरणबंदनवारआम के पत्ते
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घर के मुख्य दरवाजे पर नींबू-मिर्ची क्यों लटकाते हैं?

अलक्ष्मी को खट्टा-तीखा पसंद है इसलिए उसे दरवाजे से ही रोकने के लिए नींबू-मिर्ची लटकाते हैं। साथ ही बुरी नजर से बचाव और वातावरण की शुद्धि भी होती है।

नींबू मिर्चीबुरी नजरनजर बट्टू
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घर में दीपावली के दीये कहाँ-कहाँ रखने चाहिए?

मुख्य द्वार, तुलसी चौरा, मंदिर/पूजाघर, रसोई, घर के कोने, छत, खिड़कियाँ और दक्षिण दिशा में पितरों के लिए — इन सभी स्थानों पर दीये रखें। मिट्टी के दीये और घी-तेल सर्वोत्तम हैं।

दीपावलीदीपदानलक्ष्मी पूजन
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दरवाजे पर स्वास्तिक बनाने का सही तरीका क्या है?

स्वास्तिक सदा दक्षिणावर्त (clockwise) बनाएं, लाल सिंदूर या कुमकुम से। मुख्य द्वार पर शुभ मुहूर्त में बनाएं और फीका पड़ने पर त्योहार पर नया बनाएं।

स्वास्तिकमुख्य द्वारवास्तु
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सूर्यास्त के बाद झाड़ू क्यों नहीं लगानी चाहिए?

सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाने से माता लक्ष्मी की कृपा घर से चली जाती है और दरिद्रता आती है। सुबह सूर्योदय के बाद झाड़ू लगाना सर्वोत्तम है।

झाड़ूवास्तुलक्ष्मी
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रात को दर्पण क्यों नहीं देखना चाहिए?

रात को दर्पण देखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, बुरे सपने आते हैं और मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। सोने से पहले शयनकक्ष का दर्पण कपड़े से ढक देना चाहिए।

दर्पणवास्तुरात्रि नियम
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शनिवार को लोहे की वस्तु खरीदना शुभ है या अशुभ?

शनिवार को लोहा खरीदना अशुभ माना जाता है क्योंकि लोहा शनिदेव की धातु है और इससे उनकी नाराजगी का भय रहता है। लोहा दान करना शुभ है — खरीदना वर्जित।

शनिवारलोहाशनिदेव
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नाखून और बाल काटने के लिए कौन सा दिन शुभ है?

बुधवार और शुक्रवार नाखून-बाल काटने के लिए सबसे शुभ हैं। मंगलवार, शनिवार, रविवार और गुरुवार अशुभ माने जाते हैं। सूर्यास्त के बाद किसी भी दिन यह कार्य नहीं करना चाहिए।

नाखूनबाल काटनाज्योतिष
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दक्षिण दिशा में मुँह करके भोजन क्यों नहीं करना चाहिए?

दक्षिण यमराज की दिशा है — यहाँ मुँह करके भोजन करने से आयु, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। पूर्व और उत्तर दिशा में भोजन करना सबसे शुभ है।

भोजन दिशावास्तुदक्षिण दिशा
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भोजन के पहले और बाद में कौन से मंत्र बोलने चाहिए?

भोजन से पहले 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे' और 'ब्रह्मार्पणम्' श्लोक बोलें। भोजन के बाद पाचन हेतु 'अगस्त्यं कुम्भकर्णं च' मंत्र बोलें। भोजन से पहले हाथ-पाँव-मुँह धोना जरूरी है।

भोजन मंत्रअन्नपूर्णाब्रह्मार्पणम
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सोने से पहले धार्मिक दृष्टि से क्या करना चाहिए?

हाथ-पैर-मुँह धोकर सोएं, सोने से पहले ईश्वर-स्मरण या मंत्र जाप करें, पूर्व या दक्षिण दिशा में सिर रखें, झूठे मुँह और शाम को सोना वर्जित है।

रात्रि दिनचर्याशयन नियमधर्म
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शाम को तुलसी के पास दीपक जलाने का क्या नियम है?

सूर्यास्त से पहले गोधूलि बेला में तुलसी के पास घी या तेल का दीपक जलाएं, मुख उत्तर या पूर्व दिशा में रखें, विषम संख्या में जलाएं। रविवार को तुलसी पूजन वर्जित है।

तुलसीदीपकसंध्या पूजा
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गृह आचार एवं पूजा विधि — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर गृह आचार एवं पूजा विधि श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

गृह आचार एवं पूजा विधि को गहराई से समझने का तरीका

गृह आचार एवं पूजा विधि प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

13 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।