विस्तृत उत्तर
तोरण (जिसे बंदनवार भी कहते हैं) घर के मुख्य द्वार पर लगाने की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। यह मुख्यतः आम के पत्तों, गेंदे के फूलों और कभी-कभी धान की बालियों से बनाया जाता है।
कब लगाते हैं: तोरण किसी भी शुभ और मांगलिक अवसर पर लगाया जाता है — जैसे गृह प्रवेश, विवाह, बच्चे का जन्म, त्योहार (दीपावली, नवरात्रि, दशहरा, होली, गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया), महत्वपूर्ण पूजा-अनुष्ठान और मेहमानों के स्वागत के समय।
क्यों लगाते हैं: धार्मिक मान्यता के अनुसार मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में प्रवेश करती हैं। आम के पत्तों को पवित्र और शुभ माना गया है — यह देवी-देवताओं का आह्वान करने वाले होते हैं। एक पौराणिक मान्यता यह भी है कि भगवान मुरुगन ने आम के पत्तों से तोरण बनाने की परंपरा शुरू की जो उर्वरता, सुख और सौभाग्य का प्रतीक है।
आम के पत्ते घर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति के साथ सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं और नकारात्मकता को दरवाजे पर ही रोकते हैं। इसके साथ ही वैज्ञानिक दृष्टि से भी ताजे आम के पत्ते प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन छोड़ते हैं और वातावरण शुद्ध करते हैं।
सूखे और पुराने तोरण को तुरंत बदल देना चाहिए। सूखे पत्तों का तोरण वास्तु दोष उत्पन्न करता है। आम के पत्तों का तोरण सामान्यतः दस से पंद्रह दिन तक ताजा रहता है — इसके बाद बदल देना उचित है।

