विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में रात्रि शयन से पूर्व कुछ महत्वपूर्ण आचरणों का उल्लेख किया गया है जो शरीर, मन और आत्मा — तीनों को स्वस्थ और सुरक्षित रखते हैं।
सोने से पहले हाथ, पैर और मुँह अच्छे से धोकर सोना चाहिए। झूठे मुँह सोना शास्त्रों में वर्जित माना गया है। खाना सोने से कम से कम दो घंटे पहले खा लेना चाहिए और भोजन हल्का तथा सात्विक होना चाहिए।
सोने से पूर्व संक्षिप्त ईश्वर-स्मरण अवश्य करें। अपने इष्टदेव का स्मरण, हनुमान चालीसा का पाठ, या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' जैसे मंत्रों का जाप मन को शांत करता है और रात्रि में शुभ स्वप्न आते हैं। दिनभर के किसी भूल-चूक के लिए भगवान से क्षमा याचना करना भी उचित है।
शयन दिशा पर भी ध्यान देना चाहिए। आचारमयूख के अनुसार पूर्व दिशा में सिर रखकर सोने से विद्या-बुद्धि बढ़ती है और दक्षिण में सिर रखकर सोने से स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त होती है। उत्तर दिशा में सिर रखकर सोना हानिकारक माना गया है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार सूर्यास्त के लगभग तीन घंटे बाद शयन करना उचित है। शाम को सोना और सूर्योदय के बाद सोते रहना — दोनों को अशुभ माना गया है। सोने से ठीक पहले दर्पण नहीं देखना चाहिए और मन में नकारात्मक विचार नहीं लाने चाहिए।





