विस्तृत उत्तर
भद्राश्व वर्ष मेरु के पूर्व में स्थित है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार यहाँ के शासक भद्रश्रवा हैं। यहाँ के निवासी भगवान विष्णु के 'हयग्रीव' (या हयशीर्ष) रूप की आराधना करते हैं। हयग्रीव भगवान का वह अवतार है जो समस्त वेदों और धर्म के साक्षात् नियंता हैं और जिन्होंने प्रलय काल में रसातल से वेदों का उद्धार किया था। इस वर्ष में हयग्रीव की उपासना का गहरा रहस्य यह है कि भद्राश्व वर्ष पूर्व दिशा में स्थित है और पूर्व दिशा वेदों, ज्ञान और प्रकाश (सूर्योदय) की दिशा मानी जाती है। हयग्रीव जो अश्व के मुख वाले भगवान हैं वे ज्ञान और वेद के रक्षक हैं। इस प्रकार पूर्व दिशा में स्थित भद्राश्व वर्ष में वेद-रक्षक हयग्रीव की उपासना एक गहरे ब्रह्मांडीय और आध्यात्मिक समन्वय को दर्शाती है — पूर्व (ज्ञान की दिशा) में वेद-रक्षक की उपासना।
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