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तुलसी की परिक्रमा कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

दाहिनी ओर से (clockwise) तीन परिक्रमाएं करें, मंत्र बोलें। रविवार और एकादशी को तुलसी का स्पर्श वर्जित है।

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विस्तृत उत्तर

तुलसी माता की परिक्रमा करना अत्यंत फलदायक माना जाता है। शास्त्रों में तुलसी को विष्णुप्रिया और लक्ष्मीस्वरूपा कहा गया है — जो नियम से तुलसी की पूजा और परिक्रमा करता है उसे विष्णु और लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है।

परिक्रमा की सही विधि यह है: पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान सूर्य को जल अर्पित करें। फिर तुलसी माता को प्रणाम करके जड़ में शुद्ध जल चढ़ाएं। परिक्रमा हमेशा दाहिनी ओर से (दक्षिणावर्त / clockwise) शुरू करनी चाहिए। सामान्य पूजा में तुलसी की तीन परिक्रमाएं की जाती हैं — कुछ विशेष अवसरों पर ग्यारह या इक्कीस परिक्रमाएं भी की जाती हैं।

परिक्रमा करते समय इस मंत्र का उच्चारण करें: 'महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी। आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते॥'

यदि घर में जगह की कमी हो और चारों ओर घूमना संभव न हो, तो अपने ही स्थान पर खड़े होकर तीन बार दक्षिणावर्त घूमकर परिक्रमा पूरी की जा सकती है। परिक्रमा के समय मन शांत और एकाग्र रखें। परिक्रमा के बाद पुनः प्रणाम करें और परिवार के लिए सुख-समृद्धि की मनोकामना करें।

रविवार, एकादशी, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दिन तुलसी का स्पर्श वर्जित है, इसलिए इन दिनों परिक्रमा भी नहीं करनी चाहिए।

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