विस्तृत उत्तर
सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू न लगाने की परंपरा पुरानी और शास्त्रसम्मत मानी जाती है। वास्तु शास्त्र में झाड़ू को धन की देवी माता लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है — इसीलिए झाड़ू पर पैर रखना, उसे टूटे-फूटे हाल में रखना और उसे खड़ा करके रखना सभी अशुभ माने गए हैं।
संध्याकाल में — जब दिन और रात की सन्धि होती है — माता लक्ष्मी और सरस्वती का आगमन घर में होता है माना जाता है। इस समय झाड़ू लगाने से घर की सकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है और माता लक्ष्मी का स्वागत करने के बजाय उन्हें बाहर कर देने जैसा होता है। मान्यता है कि इससे घर में दरिद्रता का वास होने लगता है।
वास्तु के अनुसार झाड़ू के लिए सुबह सूर्योदय के बाद का समय सर्वोत्तम है। दिन के पहले चार पहरों में झाड़ू लगाना उचित है, रात के चार पहरों में वर्जित है। झाड़ू को घर में दक्षिण-पश्चिम दिशा में, छिपाकर रखना चाहिए — बाहरी व्यक्ति की नजर झाड़ू पर नहीं पड़नी चाहिए।
यदि किसी दिन मजबूरी से शाम को झाड़ू लगाना पड़े, तो कूड़े को तुरंत बाहर फेंकें — यह घर में नहीं रहना चाहिए। गुरुवार को पोंछा न लगाना शुभ माना गया है। नवरात्रि और अन्य विशेष पर्वों पर झाड़ू-पोंछे के नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है।





