विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र और लोक परंपरा में झाड़ू को लक्ष्मी जी का प्रतीक माना जाता है और इसके रखने के स्थान के विषय में स्पष्ट नियम बताए गए हैं।
झाड़ू क्यों महत्वपूर्ण है वास्तु में
- ▸झाड़ू स्वच्छता का प्रतीक है और लक्ष्मी जी स्वच्छ स्थान पर निवास करती हैं।
- ▸झाड़ू का अपमान या उपेक्षा लक्ष्मी जी के अपमान के समान माना जाता है।
- ▸दीपावली पर नई झाड़ू खरीदने की परंपरा इसी मान्यता पर आधारित है।
झाड़ू कहाँ रखें
- 1दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) कोण — यह झाड़ू रखने के लिए सर्वोत्तम दिशा मानी जाती है।
- 2छिपाकर — झाड़ू ऐसे स्थान पर रखें जहां वह दिखाई न दे — अलमारी में, दीवार के पीछे, या ढके हुए स्थान पर।
- 3खड़ी करके — झाड़ू को हमेशा खड़ा (उल्टा — सींक ऊपर, हैंडल नीचे) रखें, लेटाकर नहीं।
झाड़ू कहाँ न रखें
- 1रसोई में — रसोई में झाड़ू रखना अशुभ माना जाता है।
- 2पूजा घर में या पास — पवित्र स्थल के निकट कभी न रखें।
- 3मुख्य द्वार के पास दिखने वाली जगह — प्रवेश द्वार पर दिखाई देने वाली झाड़ू लक्ष्मी को रोकती है।
- 4बिस्तर के नीचे — शयन स्थल के नीचे झाड़ू रखना अशुभ है।
- 5पैर के पास — झाड़ू पर पैर लगना अत्यंत अशुभ माना जाता है।
अन्य महत्वपूर्ण नियम
- 1सूर्यास्त के बाद — सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाना अशुभ माना जाता है (लक्ष्मी का बाहर जाना)।
- 2टूटी झाड़ू — टूटी या घिसी हुई झाड़ू तुरंत बदलें; पुरानी झाड़ू घर में न रखें।
- 3दीपावली पर — पुरानी झाड़ू बाहर कर नई खरीदें।
- 4उधार न दें — झाड़ू किसी को उधार देना या किसी से लेना अशुभ माना जाता है।





