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विस्तृत उत्तर
वज्र या वज्रास्त्र को जीता, चुराया या बनाया नहीं जा सकता। यह एक दिव्य वरदान है जिसे केवल योग्यता और धर्म के मार्ग पर चलकर ही प्राप्त किया जा सकता है। इसके प्राथमिक धारक देवराज इंद्र हैं जो अपने पद के कारण इसे धारण करते हैं। यह अस्त्र एक अनूठी दिव्य कलाकृति है जिसे किसी और को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।
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