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विस्तृत उत्तर
सत्य बोलने का अर्थ पूछे जाने पर देखे गए विषय को बिना छिपाए व्यक्त करना बताया गया है। पाठ में कथनयोग्य और कथन के अयोग्य दोनों प्रकार के विषय का उल्लेख है, और कहा गया है कि उसे बिना छिपाए अभिव्यक्त करना सत्य है। यह सत्य की ऐसी परिभाषा है जिसमें छिपाव नहीं है और कथन यथार्थ के आधार पर है। इसलिए सत्य वाणी का सम्बन्ध सीधे और निष्कपट अभिव्यक्ति से है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 58, श्लोक 17
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