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विस्तृत उत्तर
धर्मज्ञ वह व्यक्ति है जो श्रुति और स्मृति द्वारा प्रतिपादित वर्णाश्रम धर्म को जानता है। पाठ में कहा गया है कि जो धर्म स्वर्ग आदि सुख देने वाला है और श्रुति-स्मृति में बताया गया है, उसका ज्ञान रखने से व्यक्ति धर्मज्ञ कहलाता है। इसलिए धर्मज्ञ होना केवल सामान्य धार्मिकता नहीं, बल्कि शास्त्रविहित वर्णाश्रम धर्म के स्वरूप को समझना है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 57, श्लोक 7
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