शास्त्र ज्ञानवेद और पुराण में क्या अंतर है?वेद = श्रुति, अपौरुषेय, सर्वोच्च प्रमाण, मंत्रात्मक, कठिन। पुराण = स्मृति, व्यास-संकलित, वेद-ज्ञान को कथाओं में सरल करके प्रस्तुत। वेद सूत्र रूप में, पुराण विस्तार रूप में। पुराण वेद के पूरक हैं, प्रतिस्थापन नहीं। दोनों का एक-दूसरे के बिना पूर्ण बोध कठिन।#वेद#पुराण#श्रुति
महेश्वरी धेनुमति, बुद्धि और स्मृति का संबंध महेश्वरी गाय से कैसे बताया गया है?महादेव ने उस महेश्वरी धेनु की महिमा गाते हुए कहा कि तुम मति हो, बुद्धि हो और स्मृति हो।#मति#बुद्धि
दान और साधुधर्मसाधुधर्म क्या है?श्रुति-स्मृति से विहित, वर्णाश्रम से सम्बद्ध और शिष्टाचार के अनुकूल धर्म साधुधर्म है।#साधुधर्म#श्रुति#स्मृति
धर्म और आचारधर्मज्ञ कौन होता है?श्रुति-स्मृति में बताए गए वर्णाश्रम धर्म का ज्ञान रखने वाला व्यक्ति धर्मज्ञ कहलाता है।#धर्मज्ञ#वर्णाश्रम धर्म#श्रुति
बुद्धि और प्रसादबुद्धि के अलग-अलग नाम क्यों बताए गए हैं?बुद्धि के नाम उसके कार्य और स्वरूप के अनुसार बताए गए हैं, जैसे मनन करने से मन, स्मरण करने से स्मृति और जानने से संवित्।#बुद्धि#महत्तत्त्व#प्रज्ञा
ऋषि संततिस्मृति और अंगिरा की संतान कौन थीं?स्मृति और अंगिरा से सिनीवाली, कुहू, राका, अनुमति और अग्नि उत्पन्न हुए।#स्मृति#अंगिरा#सिनीवाली
दक्ष वंशसम्भूति, स्मृति, प्रीति, क्षमा और सन्नति का विवाह किससे हुआ?सम्भूति का विवाह मरीचि से, स्मृति का अंगिरा से, प्रीति का पुलस्त्य से, क्षमा का पुलह से और सन्नति का क्रतु से हुआ।#सम्भूति#स्मृति#प्रीति
जीवन एवं मृत्युयममार्ग में कर्मों की याद क्यों आती है?यममार्ग में कर्मों की याद इसलिए आती है ताकि जीव को कर्म-बोध हो, यमलोक में न्याय की तैयारी हो और पश्चाताप जाग सके। यह पाप की एक आंतरिक यातना भी है। इसीलिए जीवन में ही पछताकर सुधरना श्रेष्ठ है।#यममार्ग#कर्म#स्मृति
जीवन एवं मृत्युक्या जीव को अपने कर्म याद आते हैं?हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद यममार्ग पर जीव को अपने पापकर्म याद आते हैं जिससे वह और अधिक पीड़ित होता है। पुण्यात्मा को सत्कर्मों की स्मृति शांति देती है। यमलोक में भी कर्मों का लेखा-जोखा होता है।#जीव#कर्म#स्मृति
जीवन एवं मृत्युक्या मृत्यु के समय व्यक्ति को अपने कर्म याद आते हैं?हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के समय जीवन के अच्छे-बुरे सभी कर्म स्वतः याद आते हैं। पुण्यकर्मी को शांति मिलती है, पापी को पछतावा और भय होता है। यही कर्म अगले जन्म की दिशा तय करते हैं।#मृत्यु#कर्म#स्मृति
जीवन एवं मृत्युमृत्यु के समय व्यक्ति को क्या याद आता है?मृत्यु के समय जीवन के कर्म स्वतः याद आते हैं। मोही को परिवार और इच्छाएँ, भक्त को ईश्वर का स्मरण होता है। अंतिम विचार ही अगला जन्म तय करता है — इसीलिए जीवन भर ईश्वर-स्मरण जरूरी है।#मृत्यु#स्मृति#अंतिम विचार
पूजा पद्धतिस्मार्त पूजा पद्धति क्या हैस्मार्त = स्मृति ग्रंथों पर आधारित पद्धति। शंकराचार्य द्वारा व्यवस्थित। विशेषता: पंचायतन पूजा — शिव, विष्णु, सूर्य, गणेश, देवी — पाँचों में एक ब्रह्म। अद्वैत वेदान्त आधार। वैदिक कर्म + पौराणिक भक्ति का समन्वय। षोडशोपचार या पंचोपचार पूजा। सन्ध्यावन्दन अनिवार्य।#स्मार्त#आदि शंकराचार्य#पंचायतन
शास्त्र ज्ञानश्रुति और स्मृति में क्या अंतर है?श्रुति = ईश्वरीय, सर्वोच्च प्राधिकार, अपरिवर्तनीय (वेद, उपनिषद)। स्मृति = मनुष्य-रचित, श्रुति से कम प्राधिकार, परिवर्तनीय (स्मृति, पुराण, इतिहास)। विरोध हो तो श्रुति प्रमाण। गीता 'श्रुति-तुल्य' मानी जाती है।#श्रुति#स्मृति#वेद
ध्यान अनुभवध्यान में अपने पूर्व जन्म के दर्शन होना संभव है क्या?हां — पतंजलि (3.18): 'संस्कार साक्षात्कार = पूर्वजन्म ज्ञान।' गहन ध्यान, कुंडलिनी, regression। कल्पना vs वास्तविक = भेद कठिन। 'वर्तमान>अतीत।' बुद्ध = 550 जन्म।#पूर्व जन्म#दर्शन#संभव