विस्तृत उत्तर
हाँ, गरुड़ पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि मृत्यु के बाद जीव को अपने कर्म स्पष्ट रूप से याद आते हैं। यह स्मृति मृत्यु से पहले भी शुरू हो जाती है और मृत्यु के बाद भी बनी रहती है।
गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में वर्णन है — यममार्ग पर चलते हुए पापी जीव 'अपने पापकर्मों को याद करते हुए पीड़ित होकर यममार्ग में चलता है।' यह स्मृति उसे और अधिक पीड़ित करती है क्योंकि वह जानता है कि उसने क्या किया था और अब कुछ बदला नहीं जा सकता।
इसके विपरीत, पुण्यात्मा को अपने अच्छे कर्मों की स्मृति शांति और संतोष देती है। यमलोक में चित्रगुप्त के समक्ष भी यह स्मृति काम आती है — वहाँ जीव के सम्पूर्ण जीवन का लेखा-जोखा होता है।
भगवद्गीता के अनुसार भी मृत्यु के समय और बाद में जो विचार प्रबल हों, वे अगले जन्म को प्रभावित करते हैं। यममार्ग पर पापकर्मों की स्मृति पछतावे का रूप लेती है। इसीलिए जीवन में ऐसे कर्म करने की शिक्षा दी जाती है जिनकी स्मृति मृत्यु के बाद शांति दे, पछतावा नहीं।





