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पूजा पद्धति📜 स्मृति ग्रंथ, आदि शंकराचार्य की परम्परा, धर्मसूत्र2 मिनट पठन

स्मार्त पूजा पद्धति क्या है

संक्षिप्त उत्तर

स्मार्त = स्मृति ग्रंथों पर आधारित पद्धति। शंकराचार्य द्वारा व्यवस्थित। विशेषता: पंचायतन पूजा — शिव, विष्णु, सूर्य, गणेश, देवी — पाँचों में एक ब्रह्म। अद्वैत वेदान्त आधार। वैदिक कर्म + पौराणिक भक्ति का समन्वय। षोडशोपचार या पंचोपचार पूजा। सन्ध्यावन्दन अनिवार्य।

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विस्तृत उत्तर

स्मार्त पूजा पद्धति 'स्मृति' ग्रंथों (मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति आदि) और वैदिक परम्परा पर आधारित उपासना शैली है। इसे आदि शंकराचार्य ने व्यवस्थित और पुनर्जीवित किया।

स्मार्त का अर्थ

स्मार्त' शब्द 'स्मृति' से बना है। स्मृति ग्रंथ वेदों के आधार पर बनाए गए धर्मशास्त्रीय ग्रंथ हैं। जो व्यक्ति स्मृतियों के अनुसार आचरण करता है, वह 'स्मार्त' कहलाता है।

प्रमुख विशेषताएँ

1पंचायतन पूजा

स्मार्त पद्धति की सबसे विशिष्ट विशेषता 'पंचायतन पूजा' है — पाँच देवताओं की एक साथ पूजा:

  • शिव (लिंग रूप में)
  • विष्णु (शालग्राम रूप में)
  • सूर्य (स्फटिक रूप में)
  • गणेश
  • देवी (दुर्गा/पार्वती)

इसमें भक्त का इष्टदेव मध्य में होता है और शेष चार चारों दिशाओं में। इससे सभी देवताओं में एक ही ब्रह्म की अभिव्यक्ति मानकर समन्वय स्थापित होता है।

2अद्वैत दर्शन

स्मार्त परम्परा शंकराचार्य के अद्वैत वेदान्त से गहराई से जुड़ी है — 'ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः।'

3वैदिक कर्म + पौराणिक भक्ति

स्मार्त पद्धति में वैदिक कर्मकाण्ड (सन्ध्यावन्दन, अग्निहोत्र, संस्कार) और पौराणिक भक्ति (मूर्ति पूजा, व्रत, तीर्थ) दोनों का समन्वय है।

4षोडशोपचार पूजा

स्मार्त परम्परा में गृहस्थ पूजा प्रायः षोडशोपचार (16 उपचार) विधि से होती है: आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, उपवीत, गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, आरती, परिक्रमा/नमस्कार।

5सन्ध्यावन्दन

स्मार्त ब्राह्मणों में प्रातः, मध्याह्न और सायं सन्ध्यावन्दन अनिवार्य दैनिक कर्म है।

6सरलता

यदि जटिल विधान सम्भव न हो तो पंचोपचार (गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य) पूजा भी मान्य है।

अन्य पद्धतियों से भेद

  • वैष्णव: केवल विष्णु/कृष्ण केन्द्रित (पाञ्चरात्र आगम)।
  • शैव: केवल शिव केन्द्रित (शैव आगम)।
  • स्मार्त: पंचदेवता — सर्वसमावेशी, सभी देवता एक ब्रह्म के रूप।
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शास्त्रीय स्रोत
स्मृति ग्रंथ, आदि शंकराचार्य की परम्परा, धर्मसूत्र
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