विस्तृत उत्तर
श्रुति और स्मृति हिंदू धर्म के ग्रंथों के दो प्रमुख वर्ग हैं।
श्रुति (Shruti) — 'जो सुनी गई'
- ▸अर्थ: 'श्रुति' = सुनना। ऋषियों ने ध्यान में इन्हें ईश्वर से सीधे 'सुना' (दर्शन किया)।
- ▸स्वरूप: अपौरुषेय (ईश्वरीय, मनुष्य-रचित नहीं)।
- ▸प्राधिकार: सर्वोच्च। श्रुति सभी प्रमाणों में सर्वोपरि है।
- ▸अपरिवर्तनीय: श्रुति में कोई परिवर्तन, संशोधन या जोड़-घटाव नहीं हो सकता।
- ▸ग्रंथ: चारों वेद (ऋग्, यजुर्, साम, अथर्व) और उनके अंग — संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद।
स्मृति (Smriti) — 'जो याद की गई'
- ▸अर्थ: 'स्मृति' = स्मरण/याद। ऋषियों/मनीषियों ने श्रुति के ज्ञान को याद करके, अपने अनुभव और विवेक से रचा।
- ▸स्वरूप: पौरुषेय (मनुष्य-रचित), श्रुति पर आधारित।
- ▸प्राधिकार: श्रुति से कम। श्रुति और स्मृति में विरोध हो तो श्रुति प्रमाण मान्य होगा।
- ▸परिवर्तनीय: काल, देश और परिस्थिति के अनुसार स्मृतियों में संशोधन संभव है।
- ▸ग्रंथ: मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति, रामायण, महाभारत, पुराण, भगवद्गीता, धर्मसूत्र, गृहसूत्र।
मुख्य अंतर
| विषय | श्रुति | स्मृति |
|-------|--------|--------|
| रचना | ईश्वरीय (अपौरुषेय) | मनुष्य-रचित (पौरुषेय) |
| प्राधिकार | सर्वोच्च | श्रुति से कम |
| परिवर्तन | अपरिवर्तनीय | परिवर्तनीय |
| ग्रंथ | वेद, उपनिषद | स्मृति, इतिहास, पुराण |
ध्यान दें: भगवद्गीता की स्थिति विशेष है — यह महाभारत (स्मृति) का भाग है, पर इसे 'श्रुति-तुल्य' (श्रुति के समान प्रामाणिक) माना जाता है।





