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शास्त्र ज्ञान📜 महा उपनिषद (6.71-73), हितोपदेश (1.3.71)2 मिनट पठन

वसुधैव कुटुम्बकम का अर्थ और किस ग्रंथ में है?

संक्षिप्त उत्तर

'वसुधैव कुटुम्बकम्' = सम्पूर्ण पृथ्वी एक परिवार। महा उपनिषद (6.71-73) — प्राथमिक स्रोत। हितोपदेश में भी। पूरा श्लोक: 'अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।' G20 2023 का motto।

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विस्तृत उत्तर

वसुधैव कुटुम्बकम' हिंदू संस्कृति का एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्रभावशाली वाक्य है।

श्लोक

*अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।

उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥*

शब्दशः अर्थ

  • वसुधा = पृथ्वी
  • एव = ही
  • कुटुम्बकम् = परिवार
  • पूरा अर्थ: 'यह अपना है, वह पराया है' — ऐसी गणना छोटे (संकीर्ण) मन वालों की है। उदार हृदय वालों के लिए तो सम्पूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है।

स्रोत

  • महा उपनिषद (6.71-73) — यह इसका प्राथमिक और प्राचीनतम स्रोत है। महा उपनिषद सामवेद से संबंधित उपनिषद है।
  • हितोपदेश (1.3.71) — नारायण पंडित द्वारा रचित नीतिग्रंथ में भी यही श्लोक उद्धृत है।
  • पंचतंत्र में भी इसी भाव का उल्लेख मिलता है।

महत्व

  1. 1विश्व बंधुत्व — सम्पूर्ण मानवता को एक परिवार मानना।
  2. 2भेदभाव रहित दृष्टि — जाति, देश, भाषा, रंग आदि के भेद से ऊपर उठना।
  3. 3सनातन मूल्य — यह श्लोक सनातन धर्म की सार्वभौमिकता का प्रतीक है।
  4. 4आधुनिक प्रासंगिकता — भारत सरकार ने इसे G20 2023 के motto के रूप में अपनाया — 'One Earth, One Family, One Future'।

ध्यान दें: कुछ विद्वान हितोपदेश के संदर्भ की ओर ध्यान दिलाते हैं जहाँ यह श्लोक एक चालाक सियार द्वारा बोला गया है — अर्थात् संदर्भ में इसका प्रयोग सावधानी से होना चाहिए। परंतु महा उपनिषद में यह शुद्ध उपदेश के रूप में है।

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शास्त्रीय स्रोत
महा उपनिषद (6.71-73), हितोपदेश (1.3.71)
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