विस्तृत उत्तर
वसुधैव कुटुम्बकम' हिंदू संस्कृति का एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्रभावशाली वाक्य है।
श्लोक
*अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥*
शब्दशः अर्थ
- ▸वसुधा = पृथ्वी
- ▸एव = ही
- ▸कुटुम्बकम् = परिवार
- ▸पूरा अर्थ: 'यह अपना है, वह पराया है' — ऐसी गणना छोटे (संकीर्ण) मन वालों की है। उदार हृदय वालों के लिए तो सम्पूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है।
स्रोत
- ▸महा उपनिषद (6.71-73) — यह इसका प्राथमिक और प्राचीनतम स्रोत है। महा उपनिषद सामवेद से संबंधित उपनिषद है।
- ▸हितोपदेश (1.3.71) — नारायण पंडित द्वारा रचित नीतिग्रंथ में भी यही श्लोक उद्धृत है।
- ▸पंचतंत्र में भी इसी भाव का उल्लेख मिलता है।
महत्व
- 1विश्व बंधुत्व — सम्पूर्ण मानवता को एक परिवार मानना।
- 2भेदभाव रहित दृष्टि — जाति, देश, भाषा, रंग आदि के भेद से ऊपर उठना।
- 3सनातन मूल्य — यह श्लोक सनातन धर्म की सार्वभौमिकता का प्रतीक है।
- 4आधुनिक प्रासंगिकता — भारत सरकार ने इसे G20 2023 के motto के रूप में अपनाया — 'One Earth, One Family, One Future'।
ध्यान दें: कुछ विद्वान हितोपदेश के संदर्भ की ओर ध्यान दिलाते हैं जहाँ यह श्लोक एक चालाक सियार द्वारा बोला गया है — अर्थात् संदर्भ में इसका प्रयोग सावधानी से होना चाहिए। परंतु महा उपनिषद में यह शुद्ध उपदेश के रूप में है।
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