विस्तृत उत्तर
सद्योजात आदि पाँच मन्त्र शिव के पंचमुखरूप की पूजा से जुड़े हैं। पहले श्वेतकल्प में सद्योजात, रक्तकल्प में वामदेव, पीतकल्प में तत्पुरुष, कृष्णकल्प में अघोर और विश्वरूपकल्प में ईशान रूप का वर्णन आता है। बाद में शिव कहते हैं कि द्विजों को पवित्र सद्योजात आदि पाँच मन्त्रों से उनके पंचमुख रूप की पूजा करनी चाहिए। इसलिए ये मन्त्र शिव के पाँचमुखी स्वरूप की उपासना से सम्बद्ध हैं।
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