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विस्तृत उत्तर
पंचमुख शिव की पूजा पवित्र सद्योजात आदि पाँच मन्त्रों से करनी चाहिए। पाठ में शिव ने ब्रह्मा से कहा कि द्विजों, अर्थात् ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य को सद्योजात आदि पाँच मन्त्रों से उनके पंचमुखरूप की पूजा करनी चाहिए। इसी क्रम में शिव ने कहा कि ब्रह्मा ने उसी भक्तिसे उनका दर्शन प्राप्त किया है। इसलिए पंचमुख पूजा मन्त्र, श्रद्धा और भक्ति से जुड़ी है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 62, श्लोक 49
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