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श्री विद्या📜 श्री विद्या परंपरा, तंत्र शास्त्र1 मिनट पठन

श्री चक्र की पूजा विधि और नौ आवरणों का क्या अर्थ है?

संक्षिप्त उत्तर

9 आवरण (बाहर→केंद्र): 1.भूपुर→2.16 कमल→3.8 कमल→4.14 त्रिकोण→5.10 बाह्य→6.10 आंतर→7.8 त्रिकोण→8.त्रिकोण→9.बिंदु (ललिता)। नवावरण पूजा = प्रत्येक आवरण के देवता। गुरु अनिवार्य।

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विस्तृत उत्तर

श्री चक्र = 9 आवरणों (मंडल) से निर्मित:

नौ आवरण (बाहर→केंद्र)

  1. 1त्रैलोक्य मोहन — भूपुर (बाहरी वर्ग) — तीन लोकों को मोहित।
  2. 2सर्वाशापरिपूरक — 16 दल कमल — सभी आशाएं पूर्ण।
  3. 3सर्वसंक्षोभण — 8 दल कमल — सम्पूर्ण क्षोभ/विकार नाश।
  4. 4सर्वसौभाग्यदायक — 14 त्रिकोण — सर्व सौभाग्य।
  5. 5सर्वार्थसाधक — 10 बाह्य त्रिकोण — सभी अर्थ सिद्ध।
  6. 6सर्वरक्षाकर — 10 आंतर त्रिकोण — सर्व रक्षा।
  7. 7सर्वरोगहर — 8 त्रिकोण — सभी रोग नाश।
  8. 8सर्वसिद्धिप्रद — त्रिकोण — सभी सिद्धि।
  9. 9सर्वानंदमय — बिंदु (केंद्र) — सर्वानंद = ललिता।

पूजा = नवावरण पूजा: बाहर से केंद्र — प्रत्येक आवरण के देवताओं की पूजा → अंत में बिंदु (ललिता)।

गुरु अनिवार्य: नवावरण पूजा = श्री विद्या का गहन अनुष्ठान।

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शास्त्रीय स्रोत
श्री विद्या परंपरा, तंत्र शास्त्र
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