विस्तृत उत्तर
त्रिआयामी (3D/मेरु प्रस्तार) = अधिक प्रभावी — अधिकांश श्री विद्या गुरुओं का मत:
त्रिआयामी (मेरु श्री यंत्र)
- ▸पिरामिड जैसी उभरी संरचना — मेरु पर्वत का प्रतीक।
- ▸ऊर्जा अधिक केंद्रित — शिखर (बिंदु) पर ऊर्जा संग्रहित।
- ▸ध्यान/पूजा में अधिक शक्तिशाली।
- ▸स्फटिक/सोने का मेरु = सर्वोत्तम।
सपाट (2D)
- ▸कागज/कपड़े/धातु पर अंकित।
- ▸ध्यान और सामान्य पूजा हेतु पर्याप्त।
- ▸सुवाह्य (portable)।
दोनों मान्य: यंत्र शक्ति = प्राण प्रतिष्ठा + भक्ति भाव पर निर्भर — आयाम गौण। प्राण-प्रतिष्ठित 2D > बिना प्रतिष्ठा 3D।
ध्यान रखें: श्री यंत्र = अत्यंत पवित्र — सही ज्यामिति अनिवार्य। नकली/गलत यंत्र = हानिकारक। विश्वसनीय स्रोत से प्राप्त करें।





