विस्तृत उत्तर
श्री यंत्र = ब्रह्मांड का सम्पूर्ण मानचित्र। इसमें 9 आवरण (layers) = सृष्टि से ब्रह्म तक की यात्रा:
9 आवरण (बाहर से भीतर)
- 1भूपुर (त्रैलोक्य मोहन): बाहरी चतुर्भुज — तीन लोकों को मोहित करने वाला। प्रवेश द्वार।
- 2षोडश दल कमल (सर्वाशापूरक): 16 पंखुड़ियां — सभी आशाएं पूर्ण।
- 3अष्ट दल कमल (सर्वसंक्षोभण): 8 पंखुड़ियां — सबको क्षुब्ध करने वाला।
- 4चतुर्दश त्रिकोण (सर्वसौभाग्यदायक): 14 त्रिकोण — सौभाग्य प्रदाता।
- 5बहिर्दश त्रिकोण (सर्वार्थसाधक): बाहरी 10 त्रिकोण — सब अर्थ सिद्ध।
- 6अंतर्दश त्रिकोण (सर्वरक्षाकर): भीतरी 10 त्रिकोण — सब रक्षा।
- 7अष्ट त्रिकोण (सर्वरोगहर): 8 त्रिकोण — सब रोग हर।
- 8त्रिकोण (सर्वसिद्धिप्रद): मूल त्रिकोण — सब सिद्धि।
- 9बिंदु (सर्वानंदमय): केंद्र बिंदु — परमानंद = ललिता स्वयं = परब्रह्म।
अर्थ: बाहर से भीतर = सांसारिक → आध्यात्मिक। 9 आवरण = 9 स्तर का ज्ञान। बिंदु = अंतिम लक्ष्य = ब्रह्म साक्षात्कार।
ध्यान रखें: नवावरण पूजा = श्री विद्या का गोपनीय अंग — गुरु दीक्षा से।





