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श्री विद्या📜 सौंदर्यलहरी (शंकराचार्य), श्री विद्या परंपरा, ललितोपाख्यान2 मिनट पठन

श्री यंत्र में नौ आवरणों का क्या अर्थ है?

संक्षिप्त उत्तर

9 आवरण (बाहर→भीतर): भूपुर (प्रवेश), 16 दल, 8 दल, 14 त्रिकोण, बाहर 10, भीतर 10, 8 त्रिकोण, मूल त्रिकोण, बिंदु (परमानंद=ललिता=ब्रह्म)। = सृष्टि→ब्रह्म यात्रा। गुरु दीक्षा से नवावरण पूजा।

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विस्तृत उत्तर

श्री यंत्र = ब्रह्मांड का सम्पूर्ण मानचित्र। इसमें 9 आवरण (layers) = सृष्टि से ब्रह्म तक की यात्रा:

9 आवरण (बाहर से भीतर)

  1. 1भूपुर (त्रैलोक्य मोहन): बाहरी चतुर्भुज — तीन लोकों को मोहित करने वाला। प्रवेश द्वार।
  2. 2षोडश दल कमल (सर्वाशापूरक): 16 पंखुड़ियां — सभी आशाएं पूर्ण।
  3. 3अष्ट दल कमल (सर्वसंक्षोभण): 8 पंखुड़ियां — सबको क्षुब्ध करने वाला।
  4. 4चतुर्दश त्रिकोण (सर्वसौभाग्यदायक): 14 त्रिकोण — सौभाग्य प्रदाता।
  5. 5बहिर्दश त्रिकोण (सर्वार्थसाधक): बाहरी 10 त्रिकोण — सब अर्थ सिद्ध।
  6. 6अंतर्दश त्रिकोण (सर्वरक्षाकर): भीतरी 10 त्रिकोण — सब रक्षा।
  7. 7अष्ट त्रिकोण (सर्वरोगहर): 8 त्रिकोण — सब रोग हर।
  8. 8त्रिकोण (सर्वसिद्धिप्रद): मूल त्रिकोण — सब सिद्धि।
  9. 9बिंदु (सर्वानंदमय): केंद्र बिंदु — परमानंद = ललिता स्वयं = परब्रह्म।

अर्थ: बाहर से भीतर = सांसारिक → आध्यात्मिक। 9 आवरण = 9 स्तर का ज्ञान। बिंदु = अंतिम लक्ष्य = ब्रह्म साक्षात्कार।

ध्यान रखें: नवावरण पूजा = श्री विद्या का गोपनीय अंग — गुरु दीक्षा से।

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शास्त्रीय स्रोत
सौंदर्यलहरी (शंकराचार्य), श्री विद्या परंपरा, ललितोपाख्यान
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