ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

ललिता — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 8 प्रश्न

🔍
श्री विद्या

श्री विद्या साधना क्या है और इसमें कौन सा यंत्र प्रमुख है?

सर्वोच्च तांत्रिक साधना — ललिता/त्रिपुर सुंदरी। प्रमुख यंत्र: श्री चक्र (यंत्र राज) — 9 त्रिकोण, 9 आवरण, बिंदु=ललिता। पंचदशाक्षरी मंत्र। गुरु अनिवार्य। शंकराचार्य प्रचारक।

श्री विद्यासाधनाश्री चक्र
शक्ति उपासना

श्री चक्र और श्री यंत्र में क्या अंतर है?

श्री चक्र = श्री यंत्र = मूलतः एक (ललिता त्रिपुरसुंदरी प्रतीक)। सूक्ष्म भेद: चक्र=2D, यंत्र=3D (मेरु)। 9 त्रिकोण (4 शिव+5 शक्ति)=43 त्रिकोण, बिंदु=परम शक्ति। सौंदर्यलहरी: ब्रह्मांड मानचित्र। गुरु दीक्षा से पूजा श्रेष्ठ।

श्री चक्रश्री यंत्रललिता
दशमहाविद्या

षोडशी त्रिपुर सुंदरी की साधना विधि क्या है?

ललिता/राजराजेश्वरी। 16 कलाएं। गुरु दीक्षा अनिवार्य। श्री चक्र + 'ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः'। पंचदशाक्षरी (15 अक्षर) = गुरु से। ललिता सहस्रनाम। धन+मोक्ष दोनों।

षोडशीत्रिपुर सुंदरीललिता
देवी ग्रंथ

ललिता त्रिशती का पाठ करने की विधि और लाभ क्या है?

ललिता त्रिशती = 300 नाम (ब्रह्माण्ड पुराण)। 15 बीजाक्षर × 20 नाम। श्री विद्या का गोपनीय अंग। विधि: प्रातः, लाल वस्त्र, श्री यंत्र, कुमकुम, लाल पुष्प। शुक्रवार/पूर्णिमा शुभ। लाभ: सौभाग्य, दांपत्य सुख, विद्या, मोक्ष। कुछ मतों में गुरु दीक्षा सहित।

ललिता त्रिशती300 नामश्री विद्या
तंत्र ग्रंथ

तंत्रराज तंत्र में श्री विद्या की साधना कैसे बताई गई है?

36 पटल, शिव-शक्ति संवाद। षोडशी मंत्र + श्री चक्र 9 आवरण + 12 उपासक मुख (Wikipedia: मनु→दुर्वासा)। कादी/हादी मत। टीका: सुभगानंद/भास्कर राय। गुरु अनिवार्य — गुप्तमें गुप्त।

तंत्रराजश्री विद्यासाधना
श्री विद्या

श्री यंत्र में नौ आवरणों का क्या अर्थ है?

9 आवरण (बाहर→भीतर): भूपुर (प्रवेश), 16 दल, 8 दल, 14 त्रिकोण, बाहर 10, भीतर 10, 8 त्रिकोण, मूल त्रिकोण, बिंदु (परमानंद=ललिता=ब्रह्म)। = सृष्टि→ब्रह्म यात्रा। गुरु दीक्षा से नवावरण पूजा।

श्री यंत्रनवावरणललिता
तंत्र साधना

त्रिपुरा सुंदरी साधना क्या है?

त्रिपुरसुंदरी = ललिता = षोडशी = श्रीविद्या की सर्वोच्च देवी। मंत्र: पंचदशाक्षरी (15 अक्षर — गुरु-दत्त), षोडशी (16 अक्षर — उच्चतम)। यंत्र: श्री यंत्र। वस्त्र: लाल रेशम। पुरश्चरण: 15 लाख। विशेषता: सौम्य तंत्र — सौंदर्य, लक्ष्मी, विद्या, और मोक्ष। श्रीविद्या = इन्हीं की विद्या।

त्रिपुरसुंदरीषोडशीललिता
श्री विद्या

श्री यंत्र की नवावरण पूजा कैसे करें?

गुरु दीक्षा अनिवार्य। बाहर (भूपुर)→भीतर (बिंदु) क्रमिक। प्रत्येक आवरण: विशिष्ट देवी+मुद्रा+मंत्र। ललिता सहस्रनाम/त्रिशती। [समीक्षा आवश्यक] — विस्तृत विधि गुरुमुखी। सामान्य: सहस्रनाम+यंत्र दर्शन=सुरक्षित।

नवावरणपूजाश्री विद्या

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।