विस्तृत उत्तर
षोडशी (तीसरी/चौथी महाविद्या) = ललिता, राजराजेश्वरी, त्रिपुर सुंदरी, श्री विद्या:
विशेषता (Mahakavya): 16 कलाओं से सम्पन्न। सबसे मनोहर। 'जो इनका आश्रय ग्रहण करे, उसमें और ईश्वर में कोई भेद नहीं।'
साधना विधि
- 1गुरु दीक्षा अनिवार्य — श्री विद्या परंपरा।
- 2श्री चक्र/श्री यंत्र स्थापित।
- 3बीज मंत्र: 'ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः' (अमर उजाला verified)।
- 4पंचदशाक्षरी मंत्र (15 अक्षर) — श्री विद्या का मूल (गुरु से प्राप्त)।
- 5ललिता सहस्रनाम पाठ।
- 6लाल वस्त्र, कुमकुम, लाल पुष्प।
लाभ: धन-ऐश्वर्य, सौंदर्य, भोग और मोक्ष दोनों। सर्वकामना पूर्ति।
needs_review: श्री विद्या = अत्यंत गोपनीय — पंचदशाक्षरी मंत्र गुरु से ही प्राप्त।





