विस्तृत उत्तर
तंत्र के सर्वशक्तिशाली मंत्रों का वर्णन कुलार्णव तंत्र और तंत्रालोक में मिलता है:
1श्री विद्या (पंचदशी) — सर्वोच्च
क ए ई ल ह्रीं, ह स क ह ल ह्रीं, स क ल ह्रीं।
— तंत्र में सर्वोच्च। केवल गुरु दीक्षा से। त्रिपुर सुंदरी = सृष्टि की आदि शक्ति।
2नवार्ण मंत्र (काली/दुर्गा)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
— नौ अक्षरों का महाशक्ति मंत्र।
3महाकाली मंत्र
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हुं हुं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हुं हुं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
4ॐ — आदि बीज
मांडूक्य उपनिषद: 'ॐ इत्येतदक्षरमिदं सर्वम्।' — सभी तंत्र मंत्रों का बीज।
5महामृत्युंजय (तंत्र में भी)
रोग, भय और मृत्यु से रक्षा। ऋग्वेद 7.59.12।
शक्ति का नियम
कुलार्णव: मंत्र की शक्ति = मंत्र × गुरु दीक्षा × साधक की श्रद्धा × नित्यता। बिना दीक्षा के शक्तिशाली मंत्र भी कमजोर।




