विस्तृत उत्तर
वैष्णवास्त्र की प्राप्ति का मार्ग अन्य दिव्यास्त्रों की तुलना में भिन्न और विशिष्ट था। यह मुख्य रूप से भगवान श्रीहरि की प्रत्यक्ष कृपा से ही प्राप्त होता था। यह किसी सामान्य तपस्या या वरदान का परिणाम मात्र नहीं था बल्कि इसे श्रीहरि की विशेष अनुकंपा का द्योतक माना जाता था। उदाहरण के लिए महाभारत में अर्जुन के पास साक्षात श्री कृष्ण सदैव उपस्थित रहते थे जो स्वयं वैष्णवास्त्र के मूर्त रूप थे। कुछ पौराणिक संदर्भों में प्रद्युम्न को यह अस्त्र इंद्र से प्राप्त होने का भी उल्लेख है।
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