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श्री विद्या📜 ललितोपाख्यान, श्री विद्या, परशुराम कल्पसूत्र1 मिनट पठन

श्री यंत्र की नवावरण पूजा कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

गुरु दीक्षा अनिवार्य। बाहर (भूपुर)→भीतर (बिंदु) क्रमिक। प्रत्येक आवरण: विशिष्ट देवी+मुद्रा+मंत्र। ललिता सहस्रनाम/त्रिशती। [समीक्षा आवश्यक] — विस्तृत विधि गुरुमुखी। सामान्य: सहस्रनाम+यंत्र दर्शन=सुरक्षित।

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विस्तृत उत्तर

नवावरण पूजा = श्री यंत्र के 9 आवरणों की क्रमिक पूजा — श्री विद्या का सबसे गोपनीय और शक्तिशाली अनुष्ठान।

सामान्य विधि (संक्षेप)

  1. 1गुरु दीक्षा अनिवार्य — बिना दीक्षा नवावरण पूजा = निषिद्ध।
  2. 2श्री यंत्र स्थापित → पंचोपचार → ध्यान।
  3. 3प्रत्येक आवरण की देवियों का नामोच्चारण और पुष्पांजलि — बाहर (भूपुर) से आरंभ → भीतर (बिंदु) की ओर।
  4. 4ललिता सहस्रनाम / ललिता त्रिशती पाठ।
  5. 5प्रत्येक आवरण = विशिष्ट मुद्रा + मंत्र + देवी समूह।
  6. 6बिंदु = ललिता महात्रिपुरसुंदरी — अंतिम पूजा।
  7. 7हवन + आरती।

[समीक्षा आवश्यक]: नवावरण पूजा की विस्तृत विधि = गुरुमुखी (मौखिक परंपरा)। सार्वजनिक स्रोतों में अपूर्ण विधि ही उपलब्ध। पूर्ण विधि = केवल श्री विद्या दीक्षित गुरु से प्राप्त करें।

सामान्य भक्त: ललिता सहस्रनाम पाठ + श्री यंत्र दर्शन = सुरक्षित और शुभ।

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शास्त्रीय स्रोत
ललितोपाख्यान, श्री विद्या, परशुराम कल्पसूत्र
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