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विस्तृत उत्तर
तारा = दूसरी महाविद्या — 'तारने वाली' (संसार सागर से पार):
परिचय: नीलवर्णा, महर्षि वशिष्ठ प्रथम उपासक। तारापीठ (पश्चिम बंगाल) प्रमुख सिद्धपीठ।
साधना विधि
- 1गुरु दीक्षा अत्यंत अनुशंसित (सौम्य-उग्र)।
- 2रात्रि/मध्यरात्रि साधना काल।
- 3नीला आसन, नीले वस्त्र।
- 4बीज मंत्र: 'ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट' — 108/1008 जप।
- 5रुद्राक्ष/स्फटिक माला।
- 6चैत्र नवमी शुक्ल पक्ष — सर्वसिद्धिकारक (अमर उजाला)।
लाभ
- ▸वाक् सिद्धि — बोला हुआ सत्य हो।
- ▸आर्थिक उन्नति + मोक्ष — भौतिक + आध्यात्मिक दोनों।
- ▸ज्ञान — विद्या, कला, बुद्धि।
- ▸तारना — संकट/भय/रोग से मुक्ति।
सावधानी: उग्र-सौम्य — गुरु मार्गदर्शन आवश्यक।
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