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यंत्र साधना📜 श्री विद्या परंपरा, यंत्र ध्यान पद्धति1 मिनट पठन

श्री यंत्र का ध्यान कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

बाहर→अंदर: भूपुर→16दल→8दल→त्रिकोण→बिंदु (ललिता)। बिंदु पर 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं' मानस। त्राटक/अर्ध-बंद। 10-20 मिनट। नवावरण = गुरु। एकाग्रता, धन, मोक्ष।

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विस्तृत उत्तर

श्री यंत्र ध्यान = सर्वोच्च यंत्र ध्यान:

विधि

  1. 1श्री यंत्र सामने (दीवार/स्टैंड) — आंखों की ऊंचाई पर।
  2. 2घी दीपक जलाएं। लाल/गुलाबी आसन।
  3. 3बाहर→अंदर: भूपुर (बाहरी वर्ग) से देखना शुरू → 16 दल → 8 दल → त्रिकोण → बिंदु (केंद्र) तक ध्यान ले जाएं।
  4. 4बिंदु पर एकाग्र: बिंदु = ललिता/लक्ष्मी। यहीं ध्यान स्थिर।
  5. 5'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं' मानस जप — बिंदु पर।
  6. 6आंखें: खुली (त्राटक) या अर्ध-बंद। 10-20 मिनट।
  7. 7अंत: बिंदु से बाहर (अंदर→बाहर) — धीरे-धीरे।

उन्नत: नवावरण पूजा = 9 आवरण → 9 देवता समूह → बिंदु (ललिता) = श्री विद्या साधना। गुरु अनिवार्य।

लाभ: एकाग्रता, शांति, धन, सौभाग्य, मोक्ष।

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शास्त्रीय स्रोत
श्री विद्या परंपरा, यंत्र ध्यान पद्धति
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