ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
ध्यान साधना📜 अद्वैत वेदांत, रमण महर्षि, पतंजलि1 मिनट पठन

ध्यान में अहंकार का विलय कैसे होता है?

संक्षिप्त उत्तर

रमण: 'मैं कौन?' → खोजो → मिलता नहीं → विलय। साक्षी ('मैं=विचार/शरीर नहीं'), समर्पण ('तेरी इच्छा'), सेवा, निर्विकल्प। कबीर: 'जब मैं था तब हरि नहीं।' 'अहंकार विलय=मोक्ष।'

📖

विस्तृत उत्तर

अहंकार विलय = ध्यान सर्वोच्च लक्ष्य:

कैसे

  1. 1'मैं कौन?' (रमण महर्षि): 'मैं कौन हूं?' = आत्मविचार → 'मैं' खोजो → मिलता नहीं → 'मैं' = विलय → आत्मा = शेष।
  2. 2साक्षी ध्यान: विचार = देखो (participate मत) → 'मैं = विचार नहीं' → 'मैं = शरीर नहीं' → 'मैं = कुछ नहीं' → विलय।
  3. 3समर्पण: 'मेरी इच्छा नहीं, तेरी इच्छा' → अहंकार = समर्पित → विलय।
  4. 4सेवा: निःस्वार्थ सेवा = 'मैं' ↓ → अहंकार ↓।
  5. 5निर्विकल्प: निर्विकल्प समाधि = अहंकार = शून्य (पतंजलि 1.3)।

कबीर (पूर्व): 'जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाहीं।'

सार: 'अहंकार = अंतिम बाधा + अंतिम विलय = मोक्ष।'

📜
शास्त्रीय स्रोत
अद्वैत वेदांत, रमण महर्षि, पतंजलि
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

अहंकारविलयकैसेध्यानमैं

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

ध्यान में अहंकार का विलय कैसे होता है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको ध्यान साधना से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर अद्वैत वेदांत, रमण महर्षि, पतंजलि पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।