विस्तृत उत्तर
ध्यान में आँखें खुली रखनी हैं या बंद — यह साधना के प्रकार, साधक की स्थिति और परंपरा पर निर्भर करता है। दोनों का अपना महत्व और उपयोग है।
आँखें बंद करके ध्यान — यह सर्वाधिक प्रचलित विधि है। जब आँखें बंद हों तो बाहरी विक्षेप कम होते हैं और मन आंतरिक अनुभव की ओर मुड़ता है। अधिकांश साधनाएं — जैसे सोहम ध्यान, श्वास-ध्यान, मानसिक जाप, ओंकार ध्यान — आँखें बंद करके की जाती हैं। इष्टदेव का मानसिक रूप धारण करना भी इसी में आता है। शुरुआती साधकों के लिए यह अधिक उपयुक्त है।
आँखें अधखुली रखकर ध्यान — बौद्ध और तिब्बती परंपराओं में आँखें थोड़ी खुली रखकर नाक की नोक पर दृष्टि स्थिर करने की विधि है। इससे नींद नहीं आती और साक्षी भाव बना रहता है।
आँखें खुली रखकर ध्यान — त्राटक साधना में आँखें पूरी खुली रखकर किसी बिंदु, दीपक की लौ या भगवान की प्रतिमा पर दृष्टि स्थिर की जाती है। यह एकाग्रता बढ़ाने की एक विशेष विधि है जिसका उल्लेख हठयोग प्रदीपिका में है।
सामान्य नियम यह है कि यदि ध्यान में नींद आने की समस्या हो तो आँखें अधखुली रखें। यदि बाहरी विक्षेप अधिक हो तो बंद करें। यदि त्राटक या बाह्य ध्यान करना हो तो खुली रखें। प्रारंभ में आँखें बंद करना अधिक सरल और फलदायी होता है।



