विस्तृत उत्तर
ध्यान के लिए समय के चुनाव में शास्त्र और परंपरा दोनों का एकमत है — ब्रह्ममुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले) सर्वश्रेष्ठ है।
सुबह का ध्यान क्यों श्रेष्ठ है — ब्रह्ममुहूर्त में प्रकृति में सात्विकता का प्रवाह सर्वाधिक होता है, वायुमंडल स्वच्छ और शांत होता है। रात की नींद के बाद मन अपेक्षाकृत शांत होता है और दिन की व्यस्तताओं का बोझ अभी नहीं होता। शरीर और मन दोनों ताजे होते हैं। इस समय किया गया ध्यान पूरे दिन की साधना-शक्ति का निर्माण करता है।
शाम का ध्यान — यह संध्याकाल में किया जाता है। दिन के कार्यों के बाद मन को विराम देकर शांत करने के लिए शाम का ध्यान उपयोगी है। संध्यावंदन की परंपरा में भी इसी समय का महत्व है। हालांकि इस समय मन में दिन भर के विचारों की उथल-पुथल रह सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण नियम — जो भी समय आप नियमित रूप से निभा सकें, वही आपके लिए सर्वश्रेष्ठ है। नियमितता सर्वोपरि है। अनियमित ब्रह्ममुहूर्त की साधना से नियमित शाम की साधना अधिक फलदायी है।
यदि दोनों समय ध्यान संभव हो तो अत्युत्तम है। सुबह आत्मिक शक्ति का संग्रह होता है और शाम को दिन की थकान और तनाव का विसर्जन।




