विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में आँखों से जुड़े मृत्युकालीन परिवर्तन का विस्तृत वर्णन मिलता है। शास्त्र के अनुसार व्यक्ति की आँखों में होने वाले परिवर्तन उसके कर्मों और स्वभाव पर निर्भर करते हैं।
जो व्यक्ति जीवन भर अत्यधिक मोह-माया में रहा हो — परिवार, संपत्ति या प्रियजनों से गहरा आसक्त रहा हो — उसके प्राण आँखों के माध्यम से निकलते हैं। ऐसे व्यक्ति की आँखें मृत्यु के समय खुली रह जाती हैं या उलट जाती हैं — क्योंकि वह प्राण छोड़ना नहीं चाहता, परंतु यमदूत बलपूर्वक आत्मा को खींचते हैं।
जो व्यक्ति अधर्म और पाप में डूबा रहा हो, उसे मृत्यु के समय यमदूत दिखाई देते हैं और भय से उसकी आँखें उलट जाती हैं। यह एक सामान्य रूप से देखी जाने वाली घटना है जिसे गरुड़ पुराण कर्मों से जोड़कर समझाता है।
जो साधु-संत या पुण्यात्मा होते हैं, उनके प्राण सिर के शीर्ष (ब्रह्मरंध्र) से या नासिका से निकलते हैं — उनकी आँखें प्रायः शांत रहती हैं और मुख पर एक दिव्य शांति होती है।
इस प्रकार आँखों की स्थिति व्यक्ति के जीवनकाल के कर्मों का दर्पण होती है।





