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जप विधि📜 पातंजल योग सूत्र — प्रत्याहार, भगवद् गीता (6.13), मंत्र महोदधि2 मिनट पठन

मंत्र जप करते समय आंखें बंद करनी चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

आँखें बंद — श्रेष्ठ (प्रत्याहार, आंतरिक दर्शन, एकाग्रता)। आँखें खुली — त्राटक जप में या ऊँघ आने पर। गीता: नाक की नोक पर दृष्टि — मध्यम मार्ग। महत्वपूर्ण: आँखों से अधिक मन का इष्ट देव पर होना।

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विस्तृत उत्तर

जप में आँखें बंद या खुली — इस पर शास्त्रों में दोनों का महत्व बताया गया है:

आँखें बंद — श्रेष्ठ (अधिकांश जप में)

  1. 1प्रत्याहार: पातंजल योग — 'इंद्रियों को बाहर से खींचकर भीतर लाना।' आँखें बंद = दृष्टि इंद्री का निग्रह।
  2. 2आंतरिक दर्शन: आँखें बंद होने पर मन में इष्ट देव का स्वरूप स्पष्ट दिखता है।
  3. 3एकाग्रता: बाहरी दृश्यों का विक्षेप नहीं।

आँखें खुली — कब उचित

  1. 1त्राटक जप: मूर्ति को एकाग्रता से देखते हुए जप — यह 'खुली आँख' का ध्यान है।
  2. 2ऊँघ आए: यदि आँखें बंद करने पर नींद आए — आधी खुली या पूरी खुली रखें।
  3. 3प्रारंभिक साधक: मूर्ति देखते हुए जप करना — ध्यान बनाए रखने में सहायक।

भगवद् गीता (6.13)

नासिकाग्रे दृष्टिम् अवस्थाप्य' — नाक की नोक पर दृष्टि (आधी बंद)। यह मध्यम मार्ग है।

मंत्र महोदधि का मत

जप में मुख्य है — मन का इष्ट देव पर होना। आँखें बंद-खुली से अधिक महत्वपूर्ण है मन की स्थिति।

सर्वोत्तम

आँखें बंद → इष्ट देव का आंतरिक दर्शन → जप।

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शास्त्रीय स्रोत
पातंजल योग सूत्र — प्रत्याहार, भगवद् गीता (6.13), मंत्र महोदधि
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