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जप विधि प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

जप विधि से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

मंत्र जप का सही तरीका क्या है?

जप का सही तरीका: स्नान → आसन (रीढ़ सीधी) → आचमन → संकल्प → गणेश वंदना → जप (माला, सुमेरु से, उपांशु/मानस) → समर्पण ('जप फल देव को अर्पित') → क्षमा प्रार्थना → कुछ क्षण मौन। संकल्प और समर्पण — दो सबसे महत्वपूर्ण।

सही तरीकापूर्ण विधिक्रम
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मंत्र जप करते समय आंखें बंद करनी चाहिए?

आँखें बंद — श्रेष्ठ (प्रत्याहार, आंतरिक दर्शन, एकाग्रता)। आँखें खुली — त्राटक जप में या ऊँघ आने पर। गीता: नाक की नोक पर दृष्टि — मध्यम मार्ग। महत्वपूर्ण: आँखों से अधिक मन का इष्ट देव पर होना।

आँखेंबंदखुली
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दुर्गा मंत्र जप कैसे करें?

दुर्गा जप: लाल आसन, रुद्राक्ष या कमलगट्टा माला, पूर्व/उत्तर मुख। नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' — नित्य 108 बार। नवरात्रि में 1008 बार। पुरश्चरण: 9 लाख जप। देवी का ध्यान 'या देवी सर्वभूतेषु...' से करें।

दुर्गा मंत्र जपनवार्ण जपविधि
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महामृत्युंजय मंत्र जप की विधि क्या है?

महामृत्युंजय जप: ब्रह्ममुहूर्त में, रुद्राक्ष माला से, शिव का ध्यान करते हुए, भस्म त्रिपुंड लगाकर। नित्य 108, रोग में 1008 बार। गंभीर संकट में 21 दिन × 1008। हवन: 'ॐ त्र्यम्बकं... स्वाहा' — तिल और घी से।

महामृत्युंजय जपरुद्राक्षविधि
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मंत्र जप की सही विधि क्या है?

मंत्र जप से पूर्व स्नान, शांत स्थान, कुश आसन, पूर्व मुख, संकल्प और गुरु स्मरण करें। माला को अनामिका और अंगूठे से पकड़ें, तर्जनी न लगाएं। मानसिक जप सर्वोत्तम है। जप के बाद माला सिर से लगाकर देवता को अर्पित करें।

मंत्र जपविधिसाधना
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जप विधि — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर जप विधि श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

जप विधि को गहराई से समझने का तरीका

जप विधि प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।